बच्चों जैसी निश्छल हंसी
बच्चों की निश्छल हंसी हर किसी का मन मोह लेती है। जहाँ उसमें कुटिलता का भाव आया वहीं मात्र औपचारिकता रह जाती है। कुटिल हंसी वाले लोग न विश्वसनीय होते हैं और न ही हितचिन्तक। बड़े लोग भी यदि बच्चों की भॉंति निश्छल हंसी हंसने लगें तो उनका तनाव समाप्त हो सकता है।
बच्चों की निश्छल हंसी स्वार्थ, दिखावे और तनाव से पूरी तरह मुक्त होती है। यह मासूमियत, पवित्रता और सच्ची खुशी का प्रतीक है जो बिना किसी कारण या बिना किसी मतलब के केवल दिल के आनन्द से फूट पड़ती है। ऐसी खिलखिलाहट से भरी हंसी बड़े से बड़े गम और तनाव को पल भर में दूर कर देती है।
इस हंसी में कोई छिपा हुआ उद्देश्य या लालच नहीं होता। यह मन को हल्का और तरोताजा कर देती है। इसे सुनकर आसपास के लोगों के चेहरे पर भी अपने आप मुस्कान आ जाती है। बच्चे बीती बातों या भविष्य की चिन्ता किए बिना सिर्फ उस पल का आनन्द लेते हैं।
सयानों का कहना है कि दिन में एकबार जोर से खिलखिलाकर अवश्य ही हंसना चाहिए। इसके बहुत लाभ होते हैं। मनुष्य के अन्तस् में विद्यमान अवसाद दूर हो जाता है और शरीर के अंग-प्रत्यंगों को प्रभावित करता है।
आज के भागमभाग वाले इस युग में सभी टेंशन में यानी परेशानी में रहते हैं। उनसे ऐसी हंसी हंसने की बात करना ही व्यर्थ हो जाता है। हंसने की मानसिकता यदि नहीं बन पाती तो मुस्कुराया भी जा सकता है। हंसने का यह वरदान ईश्वर ने केवल मनुष्यों को ही दिया है पशुओं को नहीं।
हंसने के पैसे नहीं लगते। यह तो मनुष्य की प्रसन्नता और संपन्नता की पहचान है। उसकी उन्मुक्त हंसी कई चेहरों को मुरझाने से बचा सकती है और उन्हें खुशियाँ दे सकती है। एक बच्चा जब खिलखिलता हुआ सबके सामने आता हैं तो सब लोग अपनी परेशानी भूलकर उसके साथ खुश होने लगते हैं। उसकी भोली-भाली शरारतें हर किसी को गुदगुदा देती हैं। बड़े भी उस समय उसके साथ बच्चा बन जाते हैं और भूल जाते हैं कि वे बच्चा नहीं एक समझदार इन्सान हैं।
भारत में यहाँ-वहाँ पार्को में लाफ्टर क्लब बने हुए हैं। वहॉं सदस्य अपनी हंसी का जलवा दिखाते हैं। उन्हें देखकर अनजान आदमी यही सोचेगा की ये सभी लोग पागल हो गए हैं जो अजीब-सी हरकते कर रहे हैं।
आज की भागमभाग वाली जिन्दगी और काम के बोझ के कारण हमें यह याद ही नहीं रहता कि खिलखिलाकर हम कब हंसे थे? हंसना बहुत महत्त्वपूर्ण है परन्तु हम उसे अनदेखा करके अपनी मजबूरियों का रोना रोते रहते हैं। जिन्दगी हंसने की बदौलत स्वस्थ एवं खुशनुमा बन सकती है।
खुलकर हंसना व्यायाम की श्रेणी में आता है। यह व्यायाम मनुष्य के शारीरिक, मानसिक, इमोशनल, आध्यात्मिक और सामाजिक स्वास्थ्य में सुधार लाता है। इसी प्रकार उसके वैयक्तिक, कार्यक्षेत्र और समाज की सेहत में भी बहुत सुधार लाता है।
हंसने से हृदय में रक्त का संचार होता है। शरीर से निकलने वाला एंडोर्फिन रसायन हृदय को मजबूत बनाता है। सबसे प्रमुख बात यह होती है कि हंसने से हार्ट-अटैक की सम्भावना कम हो जाती है। मनुष्य स्वस्थ रहता है।
हंसने से ऑक्सीजन अधिक मात्रा में मिलती है और शरीर का प्रतिरक्षातन्त्र मजबूत हो जाता है। इससे कैंसर कोशिका और कई प्रकार के हानिकारक बैक्टीरिया एवं वायरस नष्ट हो जाते हैं।
यदि प्रातः काल हास्य ध्यान योग किया जाए तो दिन भर प्रसन्नता रहती है। रात इस योग को करने से नींद अच्छी आती है। शरीर में कई प्रकार के हारमोंस का स्राव होता है, जिससे मधुमेह, पीठ-दर्द एवं तनाव से पीङित व्यक्तियों को लाभ होता है।
हँसने से मनुष्य में सकारत्मक ऊर्जा बढती है। खुशहाल सुबह से कार्यक्षेत्र का माहौल भी खुशनुमा होता है। चुटकुले पढ़कर या सुनकर दिन की शुरूआत एक जोरदार हंसी के साथ की जा सकती है।
कहते हैं कि प्रतिदिन एक घण्टा हँसने से 400 कैलोरी ऊर्जा की खपत होती है और मनुष्य का मोटापा नियन्त्रित रहता है।
प्रकृति भी यही समझाती है कि जिस प्रकार वर्षा के बाद खिली धूप, खिले हुआ फूल और लहलहाते हरे भरे पेड़ अपनी प्रसन्नता को प्रकट करते हैं उसी प्रकार मनुष्य को भी समय-समय पर अपनी खुशी प्रकट करते रहना चाहिए।
मनोवैज्ञानिक प्रयोगों से स्पष्ट हुआ है कि अधिक हंसने वाले बच्चे अपेक्षाकृत अधिक बुद्धिमान होते हैं। जापान के लोग अपने बच्चों को प्रारम्भ से ही हंसते रहने की शिक्षा देते हैं।
इस हंसने के लाभ बहुत हैं पर हानि कोई नही होती। इसलिए जब भी अवसर मिले खिलखिलाकर हंसना मत भूलिए। जब हम स्वयं खुश एवं स्वस्थ रहेंगे तभी अपने आसपास का वातावरण भी खुशनुमा बना सकेंगे। इससे स्वयं को तो आनन्द आता ही हैं दूसरे भी आनन्दित होते हैं। हास-परिहास दुःख और कष्ट का दुश्मन है, निराशा और चिन्ता का अचूक इलाज यानी रामबाण औषधि है।
चन्द्र प्रभा सूद