शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

ईश्वर की ओर से मिले उपहार

ईश्वर की ओर से मिले उपहार

ईश्वर की ओर से बहुत-से ऐसे गुण हैं जो हमें उपहार स्वरूप अर्थात् नि:शुल्क मिले हुए है। बहुत आश्चर्य की बात है कि उनके विषय में हम जानकर भी अनजान बने रहना चाहते हैं। इस संसार में रहने वाले हम मनुष्य ऐसे कृतघ्न हैं जो सदा उनकी अवहेलना करते हैं, उन्हें अपने जीवन में ढालना ही नहीं चाहते। यदि उन्हें अपना लिया जाए तो मानव जीवन का नक्शा ही बदल सकता है।
          सबसे पहले ईश्वर ने हमारे लालन-पालन के लिए हमें माता-पिता का उपहार दिया। वे निस्वार्थ भाव से हमें योग्य बनाते हैं और संसार में सिर ऊॅंचा उठाकर चलने में सहायता करते हैं। उसने हमें सगे सम्बन्धी भेंट में दिए हैं जो हमारी भुजाऍं बनकर हमारी शक्ति बढ़ाते हैं। सुख-दुख में हमारे साथ खड़े रहकर हमारा सहारा बनते हैं।
          मनुष्य को सबसे बड़ा अनमोल उपहार बुद्धि के रूप में मिला है। यह बुद्धि उसे इस संसार के अन्य सभी जीवों से अलग बनाती है। यह बुद्धि उसकी सबसे बड़ी अपनी सम्पत्ति होती है। अपनी बुद्धि का सदुपयोग करके वह सर्वांगीण विकास कर सकता है। इसकी बदौलत मनुष्य समाज में अपना विशेष सम्माननीय स्थान बनाता है। निस्सन्देह बुद्धिमान व्यक्ति अपने बुद्धिबल के कारण लोगों का मार्गदर्शक बनता है।
          यदि मनुष्य बुद्धि का सकारात्मक प्रयोग करता है तो वह संसार में अपना एक स्थान बनाता है। मानुषी बुद्धि शेर जैसे खूँखार और हाथी जैसे शक्तिशाली जीवों को अपने वश में कर लेता है। मनुष्य विभिन्न पशुओं के उपयोग से अपने अनेक कार्य करवा लेता है जिससे उसका जीवन सरलता और सुगमता से चलता है। 
          ऐसे ही लोग चमत्कार करके विश्व को आश्चर्यचकित कर  देते हैं। सभी लोग अपने दाँतों तले अँगुली दबा लेते हैं। संसार में हुए वैज्ञानिक अविष्कार इसी बुद्धि की उपज हैं। महान लोग अपनी सद् बुद्धि के कारण ही समाज का नेतृत्व करते हैं और उसे दशा व दिशा प्रदान करते हैं। वै युग-युगान्तरों तक याद किए जाते हैं। 
      इसके विपरीत बुद्धि का दुरूपयोग मनुष्य के विनाश का कारण बन जाता है। यदि बुद्धि को नकारात्मक रास्ते पर चलाया जाए तो मनुष्य कुमार्गगामी बनता है। उसे समाज में सदा तिरस्कार मिलता है। हर कोई उसे तिरस्कृत करता है। समाज ऐसे व्यक्ति को अलग-थलग करने से नहीं चूकता। जब वह न्याय व्यवस्था का दोषी बन जाता है तो वह उसके कुकृत्यों के लिए उसे कुफल यानी सजा सुना देती है।
        मनुष्य का सुरक्षा कवच उसका दूसरों के प्रति विश्वास है। परस्पर विश्वास करके ही वह सुखी रह सकता है। हाँ, सावधान रहना बहुत ही आवश्यक होता है। किसी पर अन्धविश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरा व्यक्ति कभी भी विश्वासघात कर सकता है।
          वैसे तो दुनिया विश्वास पर ही चलती हैं। करोड़ों का व्यापार इसी विश्वास के भरोसे उचन्ती में किया जाता है। यदि मनुष्य हर किसी पर सन्देह करने लगेगा तो वह पागल हो जाएगा। तब फिर वह किसी के साथ कभी व्यवहार ही नहीं कर पाएगा। इस तरह से वह समाज से कटकर रह जाएगा जिससे उसका जीना दुश्वार हो जाएगा।       
          मनुष्य की निश्छल हँसी ही उसकी सबसे बढ़िया औषधि है जो अनेक रोगों की दवा है। सामने वाला कितना भी दुखी क्यों न हो उसका स्वागत यदि निश्छल हँसी से किया जाए तो वह कुछ समय के लिए अपनी परेशानियों को भूल जाता है। तब वह स्वयं को तरोताजा महसूस करने लगता है।
        मनुष्य का सबसे अच्छा शस्त्र उसका धैर्य है। इसकी बदौलत वह सबके हृदयों में अपना स्थान बना लेता है। ऐसे धैर्यशाली व्यक्ति अपने धैर्य से किसी को भी अपना प्रिय बना लेते हैं। ये लोग धैर्य से दूसरे की परेशानी सुनकर उन्हें सद्परामर्श देते हैं। स्वयं भी विपत्ति में घबराते नहीं है।
        ये हर परिस्थिति में एक समान रहते हैं। कैसी भी दुख-परेशानी जीवन में आ जाए अपना आपा नहीं खोते। किसी भी समस्या का समाधान धैर्य धारण करके सूझबूझ द्वारा किया जा सकता है। अफरा-तफरी मचाकर या घबराकर कोई हल नहीं निकलता बल्कि समस्याएँ और अधिक उलझ जाती हैं। उन्हें सुलझाने में मनुष्य परेशान हो जाता है।
         इन उपहारों के साथ-साथ ईश्वर की बनाई यह सारी प्रकृति हमारी सेवा में तत्पर रहती है। पृथ्वी पर हम अपना घर बनाकर रहते हैं। यह हमारे जीवन के लिए अन्न, फल आदि देती है। वायु के बिना हम एक पल भी जीवित नहीं रह सकते। उसके बिना हमारे प्राण हमारा साथ नहीं दे सकते। शरीर में विद्यमान अग्नि हमारे पाचन तन्त्र को मजबूत बनाती है। 
         नदियॉं और समुद्र से हमें जल प्राप्त होता है। जल हमारी जीवनी शक्ति है। इनसे हमारा आवागमन सरल होता है। सुन्दर वन हमारा मन मोह लेते हैं। अनेक पशु-पक्षियों की सृष्टि ईश्वर ने की है। ये हमारा जीवन सरल बनाते हैं। सूर्य, चन्द्रमा आदि ग्रह-नक्षत्र हमें बहुत कुछ देते हैं। 
         कहने का तात्पर्य यही है कि ईश्वर ने हमें इतने सारे उपहार भेंट स्वरूप दिए हैं। हम मनुष्यों के लिए ईश्वर ने सम्पूर्ण सृष्टि की रचना की है। ताकि हम लोगों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो सके। फिर भी हम यदि उसके प्रति अपनी कृतज्ञता प्रकट न करें तो हमसे अधम कोई और नहीं हो सकता।
चन्द्र प्रभा सूद

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