शनिवार, 10 जनवरी 2026

किशोरावास्था में अकेलेपन की समस्या

किशोरावस्था में अकेलेपन की समस्या 

आज के भाग्म भाग वाले जीवन में किशोरावस्था में भी बहुत सारी चुनौतियों का सामना किशोरों को करना पड़ता है। उन पर अकेलापन हावी होता जा रहा है। वे दिन-प्रतिदिन चिड़चिड़े होते जा रहे हैं। आजकल प्राय: सभी लोग शिकायत करते है कि किशोर किसी के साथ सीधे मुँह बात नहीं करते। पता नहीं वे किस नशे में रहते हैं। परन्तु बच्चे इस अकेलेपन की समस्या से झूझते हुए दिखाई देते हैं। किशोरों की यह अवस्था युवावस्था और बाल्यावस्था के बीच में पुल की तरह होती है। 
             किशोरावस्था में अकेलापन एक आम और गम्भीर समस्या बनती जा रही है जो पहचान बनाने, सामाजिक दबाव बनाने, सोशल मीडिया और मानसिक संघर्ष के कारण हो सकती है। इससे अलगाव, उदासी, चिड़चिड़ापन और शारीरिक समस्याऍं पैदा होने लगती हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता पर इसका प्रभाव पड़ने लगता है। इस अवस्था में किशोर स्वयं को बड़ा घोषित करना चाहते हैं परन्तु उनका मानसिक स्तर बड़ों जैसा नहीं होता है। 
            किशोरों में भावनाओं को नियन्त्रित करने वाला हिस्सा अपरिपक्व होता है। इस कारण वे अकेलापन अधिक अनुभव करते हैं। स्वयं को समझने की प्रक्रिया में वे‌ अकेलापन महसूस करने लगते हैं। दूसरों की परफेक्ट जिन्दगी को देखकर उन्हें पीछे छूट जाने का डर सताने लगता है। वे अपनी तुलना दूसरों से करने‌ लगते हैं। ऐसा करना उनके लिए उचित नहीं कहा जा सकता। वे भूल जाते हैं कि हर व्यक्ति की क्षमता एक जैसी नहीं होती है।
             वे अपने लिए पूर्ण स्वतन्त्रता चाहते हैं परन्तु उसके मायने न पता होने पर उसे सम्हाल नहीं पाते। उस स्वतन्त्रता का दुरूपयोग करते हुए कुछ किशोर यदाकदा बुरे दोस्तों की संगति में पड़कर जाते हैं यानी मित्रों के कहने में आकर व्यसनों में उलझ जाते हैं। इस प्रकार अपना जीवन बर्बाद कर लेते हैं।
          इस वय में वे छोटे भाई-बहनों के साथ रहना पसद नहीं करते। वे उन्हें अपने बराबर के नहीं लगते। इसलिए वे उनसे दूरी बनाकर रहते हैं। बड़े उन्हें बच्चा मानते हुए अनदेखा करते हैं। इस कारण वे निपट अकेले हो जाते हैं। अपने इस अकेलेपन को दूर करने के लिए वे नित नए उपाय तलाशते हैं। हमउम्र साथियों को ढूँढते हैं। उनके साथ वे अपना समय व्यतीत करते हैं, मौज-मस्ती करते हैं, हंसी-मजाक करते हैं और घूमते-फिरते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसे दोस्तों को खोजकर उन्होंने कोई खजाना पा लिया है।
              वे अपने माता-पिता का समय चाहते हैं। वे उनसे सलाह-मशविरा करना चाहते हैं। स्कूल और अपने दोस्तों की समस्याओं को उनके साथ शेयर करना चाहते हैं। वे माता-पिता की डाँट-डपट के लिए तरसते हैं। पर माता-पिता दोनों अपने-अपने कार्य-व्यवसाय में सवेरे से शाम तक बहुत ही व्यस्त रहते हैं। सुविधा सम्पन्न घरों  की स्त्रियाँ जो नौकरी या व्यवसाय नहीं करतीं वे क्लबों, किटी पार्टियों या शापिंग आदि में व्यस्त रहती हैं। उनके पास भी बच्चों के लिए समय का अभाव रहता है।
           समयाभाव के मुआवजे के रूप में वे बच्चों को उनकी मनपसन्दीदा मंहगी वस्तुएँ खरीदकर देते हैं। घूमने जाने पर उनको आवश्यकता से अधिक धन थमाकर उनका दिल जीतने की नाकाम कोशिश करते हैं। किशोरों को धन से अधिक माता-पिता से लाड-प्यार करने की आवश्यकता होती हैं। वे बचपन की तरह उनके साथ रूठने-मानने का खेल खेलना चाहते हैं। बहुत दुखी की बात है कि उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पाती।
            घर में सबके बीच रहते हुए भी वे स्वयं को बहुत अकेला महसूस करते हैं। अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए वे अपने कमरे में अकेले बैठकर टीवी देखना और गेम्स खेलना पसन्द करते हैं। मोबाइल पर वाट्स अप से दोस्तों से गप्पें हाँककर सन्तुष्ट होते हैं। फेसबुक पर मनपसन्द पोस्ट या वीडियो देखकर अपना समय बिताना उन्हें अच्छा लगता है। अपनी पसन्द के गाने सुनते हुए वे अपना मन बहलाने की नाकामयाब कोशिश करते हैं।
             किशोरावस्था में बच्चे संक्रमण काल से गुजर रहे होते हैं उन्हें इस अवस्था में मात-पिता के प्यार-दुलार की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। वे उनका ध्यान आकर्षित करने की भरसक कोशिश करते हैं। उन्हें संस्कार देने की बहुत जरूरत होती है। इस अवस्था से सभी को ही गुजरना होता है। माता-पिता को किशोरावस्था की कठिनाइयों को समझने का प्रयास करना चाहिए। बच्चों से वार्तालाप करते रहना चाहिए। उनकी छोटी-छोटी समस्याओं को सुलझाना चाहिए। 
            किशोरों के साथ मित्रवत व्यवहार करते हुए उन्हें आश्वस्त करना चाहिए कि जीवन के इस कठिन दौर में वे अकेले नहीं हैं बल्कि माता-पिता उनके साथ हैं। यह विश्वास किशोरों की बहुत बड़ी पूँजी होता है अन्यथा वे दुनिया की भीड़ में स्वयं को अकेला समझते हुए निराश हो जाते हैं। इसलिए अकेलेपन की समस्या से झूझते हुए कुछ किशोर डिप्रेशन के भी शिकार हो जाते हैं।
चन्द्र प्रभा सूद 

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