बेमेल विवाह
अपने आसपास हम कई बेमेल या अनमेल जोड़ों को देखते हैं। इन जोड़ों में बहुधा पुरुषों की आयु अधिक होती है और पत्नी कम आयु की होती है। हालॉंकि यह अपराध नहीं कहा जा सकता परन्तु कई बार यह सम्बन्ध समस्याओं को भी जन्म दे देते हैं।
बेमेल विवाह के इस विषय को विद्वानों ने अपने-अपने तरीके से उठाया है। इससे सम्बन्धित कुछ फिल्में भी बनी हैं। टीवी सीरियल से भी यह विषय अछूता नहीं है। इस बेमेल विवाह के कई कारण हो सकते हैं। आइए इन कारणों पर चर्चा करने का प्रयास करते हैं।
माता-पिता की आर्थिक स्थिति प्रमुख कारण हो सकती है। इसके अतिरिक्त माता अथवा पिता, किसी एक का परलोक सिधारना भी कारण हो सकता है। कभी-कभी अधिक आयु वाला व्यक्ति धन का प्रलोभन देकर भी ऐसा विवाह कर लेता है। यद्यपि ऐसे विवाह को किसी भी तरह से उचित नहीं कहा जा सकता।
पत्नी की मृत्यु के पश्चात अपने घर व बच्चों की देखभाल के लिए कम आयु की युवती से विवाह कर लिया जाता है। कभी-कभी युवावस्था में अपने दायित्वों का निर्वहण करते हुए विवाह योग्य आयु कब बीत जाती है, युवक को पता ही नहीं चलता। उस परिस्थिति में भी ऐसा बेमेल विवाह हो जाता है। इसके अतिरिक्त वृद्धावस्था के अकेलेपन को दूर करने के लिए भी कुछ साधन सम्पन्न लोग ऐसा विवाह कर लेते हैं।
कई बार समय साधनहीन लोग दहेज न दे पाने या अन्य किसी मजबूरी के चलते अपनी कम आयु बेटी का विवाह किसी अधेड़ व्यक्ति से करने के लिए विवश हो जाते हैं। लोग प्रायः उन्हें पिता व पुत्री समझ लेते हैं। इस कारण कभी-कभी उन्हें शर्मिन्दा होना पड़ता है।
पुरुष यदि अधिक आयु का हो तो वह इसी परेशानी में रहता है कि यदि कहीं उसकी पत्नी को उसका हमउम्र साथी मिल गया और उससे उसे प्यार हो गया तो क्या होगा? इसलिए वह उसकी हर जायज-नाजायज माँग को पूरा करता रहता है। कभी-कभी धन-दौलत के लालच में भी कम आयु की महिला उससे शादी कर लेती है। उसके पीछे प्रायः स्वार्थ ही कारण होता है। स्वार्थपूर्ति हो जाने के उपरान्त उसकी दशा शोचनीय हो जाती है।
समाज में ऐसा भी देखा गया है कि अधेड़ आयु का पति अपनी पत्नी के अत्याचार व उसका किसी औरर से शारीरिक सम्बन्ध इसलिए सहन कर लेता है ताकि जग हसाई न होने पाए। इस डर से बचने के लिए वह विवश हो जाता है। इससे भी बढ़कर त्रासदी यह होती है कि अधेड़ पति के युवा बच्चे उस कम आयु माँ को स्वीकार न करके उससे नफरत करते हैं।
इस तरह मनों में घुलने वाला जहर किसी की भी हत्या करवा देता है। कभीकभार पत्नी भी अपने युवा प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति की हत्या का पडयन्त्र रच डालती है और फिर सबकुछ लेकर फरार हो जाती है।
अब हम चर्चा करते हैं जब पत्नी की आयु पति से अधिक होती है। वैसे शादियों के मुहूर्त निकालने वाले पण्डित मानते हैं कि पत्नी यदि आयु में बड़ी हो तो शुभ होता है। वे दो या अढ़ाई वर्ष तक पत्नी का बड़ा होना शुभ मानते हैं।
समस्या तब होती है जब पत्नी दस से बीस वर्ष तक अपने पति से बड़ी होती है। सहानुभूति के कारण या धन-सम्पत्ति के लालच में किए गए इस वैवाहिक सम्बन्ध में परेशानियाँ अधिक होती हैं। आयु के अधिक अन्तर के कारण पत्नी शीघ्र ही अधेड़ावस्था में पहुँच जाती है और पति अभी युवा ही रहता है। ऐसी स्थिति में वह कामेच्छाओं की पूर्ति के लिए इधर-उधर भटकने लगता है। विवाहेत्तर सम्बन्ध तक बना लेता है। जिसका परिणाम नित्य कलह-क्लेश होता है। इस सम्बन्ध का अन्त भी किसी एक की हत्या हो सकता है।
पति या पत्नी कोई भी यदि आयु में वृद्ध है तो उसका परिणाम प्रायः सभी को भुगतना पड़ता है। यदि दोनों की आयु में कम अन्तर हो तो गृहस्थी कुछ अधिक सुविधा से चलती है। माता-पिता को चाहिए कि अपने बच्चों के बेमेल विवाह कराने से बचें ताकि उनका और उनके बच्चों की जिन्दगी का सफर सुहाना हो सके। पति-पत्नी दोनों प्रसन्नता पूर्वक अपनी गृहस्थी की गाड़ी को चलाने में सक्षम हो सकें।
चन्द्र प्रभा सूद
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