स्वप्न मनुष्य जीवन का हिस्सा
स्वप्न मनुष्य जीवन का एक अभिन्न हिस्सा हैं। स्वप्न देखना और निद्रा आपस में जुड़े हुए हैं। अभी तक यह एक रहस्य बना हुआ है कि ये स्वपन मनुष्य को क्यों आते हैं? इन स्वप्नों का अर्थ है? विद्वान इनका अर्थ अपने अनुसार करते हैं। हम यहाँ पर दिवास्वप्न की चर्चा नहीं करेंगे।
जब इन्सान सोता है तो उसे स्वप्न आते हैं।नींद के समय आने वाले स्वप्न भी मनुष्य के जीवन को बदलने का काम करते हैं। ये सपने 7 प्रकार के होते हैं - दरुस्ट, श्रुत, अनुभूत, प्रार्थित, कल्पित, भाविक, दोषित। इनमें दरुस्ट, श्रुत, अनुभूत, प्रार्थित सपनों का कोई महत्व नहीं होता। भाविक और दोषित सपनों के सत्य होने की सम्भावना अधिक रहती है। इनसे कभी-कभी हमें प्रेरणा मिलती है और कभी चेतावनी भी। इन स्वप्नों के माध्यम से शुभ-अशुभ घटनाओं की जानकारी मिलती रहती है।
कभी-कभी हम सवेरे उठते हैं तो तरोताजा महसूस करते हैं और कभी परेशान होते हैं। इसका अर्थ यह हुआ कि कुछ स्वप्नों में हम जीवन का आनन्द लेते हैं, घूमते-फिरते हैं, उड़ते हैं और तैरते हैं, जीवित या मृत, बन्धु-बान्धवों से मिलते हैं।
विकिपीडिया के अनुसार स्वप्न छवियों, विचारों, भावनाओं और सम्वेदनाओं का एक क्रम है। यह आमतौर पर निद्रा के कुछ चरणों के दौरान मन में अनैच्छिक रूप से होता है। मनुष्य प्रति रात लगभग दो घण्टे स्वप्न देखने में व्यतीत करता है। प्रत्येक स्वप्न लगभग 5 से 20 मिनट तक रहता है। यद्यपि स्वप्न देखने वाले को यह स्वप्न इससे कहीं अधिक लम्बा प्रतीत हो सकता है।
स्वप्नों की सामग्री और कार्य लिपिबद्ध इतिहास में वैज्ञानिक, दार्शनिक और धार्मिक रुचि के विषय रहे हैं। तीसरी सहस्राब्दी ईसा पूर्व में बेबीलोनियों द्वारा और प्राचीन सुमेरियों द्वारा पहले भी प्रचलित स्वप्न व्याख्या, कई परम्पराओं में धार्मिक ग्रन्थों में प्रमुखता से आती है। मनोचिकित्सा में प्रमुख भूमिका निभाई है। स्वप्नों के वैज्ञानिक अध्ययन को ओनेइरोलोजी कहा जाता है।
अधिकांश आधुनिक स्वप्नाध्ययन स्वप्नों के तन्त्रिका-क्रियाविज्ञान और स्वप्न कार्य के सम्बन्ध में परिकल्पनाओं के प्रस्ताव और परीक्षण पर केंद्रित होते हैं। यह ज्ञात नहीं है कि मस्तिष्क में स्वप्नों की उत्पत्ति कहाँ से होती है, यदि स्वप्नों की एक ही उत्पत्ति है या यदि मस्तिष्क के कई क्षेत्र शामिल हैं, या शरीर या मन के लिए सपने देखने का उद्देश्य क्या है।
कुछ विद्वान मानते हैं कि ये सपने हमारे आसपास के वातावरण से प्रभावित होते हैं और कुछ विद्वानों का मानना है कि सपनों में हम अपनी अतृप्त इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। हम कह सकते हैं कि स्वप्न विकारयुक्त या निर्विकार होते हैं।
सपनों का भी एक शास्त्र होता है। विश्व के सभी विद्वान इसे मानते हैं। इन सपनों का विश्लेषण करते हुए विद्वानों ने कुछ सिद्धांत बनाए हैं पर स्वप्न शास्त्र पर कोई प्रामाणिक ग्रन्थ नहीं है। यह इतना जटिल एवं विस्तृत है कि इस विषय पर किसी ग्रन्थ को लिख पाना संभव नहीं। इतने प्रकार के स्वप्न सभी लोगों को आते हैं कि उन्हें पुस्तकाकार रूप आज तक नहीं दिया जा सका।
विद्वानों का मानना है कि यदि एक ही रात में शुभ और अशुभ आएँ तो जो घटना या प्रसंग स्वप्न के अंत में दिखाई दे तो उसके अनुसार फल मिलता है। वैसे कहा जाता है कि प्रातः काल यदि शुभ स्वप्न दिखाई दे तो उसके बाद सोना नहीं चाहिए। इसके विपरीत यदि अशुभ स्वप्न दिखाई तो पुनः सो जाना चाहिए। सपने सच्चे होते या झूठे यह हमेशा विवाद का विषय रहा है।
हम कुछ ऐसे सपने भी देखते हैं जो बेसिर पैर के होते हैं। उनका ओरछोर समझ में नहीं आता। कुछ विद्वानों का मानना है कि यह सब अंधविश्वास के कारण उत्पन्न होते हैं और अप्रामाणिक होते हैं।
भारतीय मनीषियों ने तीन अवस्थाएँ मानी हैं- जाग्रत, स्वप्न और सुषुप्ति। जाग्रत और स्वप्न अवस्थाओं में स्वप्न दिखाई देते हैं परन्तु सुषुप्ति अवस्था में स्वप्न नहीं आते। उस समय जीव गहरी नींद का आनन्द लेता है।
तात्पर्य यह है कि स्वप्न इन स्थूल आँखों से नहीं देखे जाते बल्कि यह सूक्ष्म विषय है। भारतीय मनीषियों ने अपनी दिव्य दृष्टि से इनका विश्लेषण किया है। पुराणों में भी शुभ और अशुभ स्वप्नों की चर्चा मिलती है।
यह भी माना जाता है कि जन्म जन्मान्तरों के संस्कार जीव को स्वप्न में दिखाई देते हैं। कभी-कभी टेलीपेथी के माध्यम से भी मन का जुड़ाव होने से स्वप्न में विचारों का आदान-प्रदान हो जाता है। यदि स्वप्नों के डर से मनुष्य नींद न ले तो वह पागल हो जाएगा।
यदि एक स्वप्न बार-बार आए तो वह किसी घटना विशेष का सूचक होता है। कुछ सपने हमारे गम्भीर रहस्यों को भी सुलझाते हैं जिन्हें हम जागते हुए सुलझाने में असमर्थ होते हैं।
वास्तव में ये स्वप्न एक ऐसी पहेली है जिसे विद्वान अपनी-अपनी योग्यता से सुलझाने का प्रयास करते रहते हैं। मनुष्य में भी अपने स्वप्नों का अर्थ जानने की उत्सुकता बनी रहती है। यह शास्त्र हमेशा से ही अनुसन्धान का विषय रहा है। भविष्य में भी इस पर चर्चा होती ही रहेगी ऐसा विश्वास है। सपनों के पीछे भागते हुए मनुष्य को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है।
चन्द्र प्रभा सूद
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